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दुनिया तो चाहती है तबाही मेरी मगर, मजबूर है वो मां की दुआओं के सामने


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Ajmer: इस्माईलपुर तकिया में भव्य ‘शान-ए-रिसालत’ जलसा। गोरखपुर 2 फरवरी। शहर के इस्माईलपुर तकिया में शुक्रवार को भव्य ‘शान-ए-रिसालत’ जलसा आयोजित किया गया। अध्यक्षता मुफ्ती अख्तर हुसैन (मुफ्ती-ए-गोरखपुर) व संचालन मौलाना मकसूद आलम मिस्बाही ने किया। करीब 600 अकीदतमंदों में लंगर बांटा गया। जलसे की शुरुआत कारी सरफुद्दीन की तिलावत-ए- कुरआन से और कारी नसीमुल्लाह की नात ख्वानी से हुई। मुख्य अतिथि अन्तर्राष्ट्रीय वक्ता पीरे तरीकत सैयद मो. नूरानी मियां ने कहा कि हमारे समाज में उसी वक्त अमन हो सकता है, जब हम अच्छे और नेक बनेंगे। हर शख्स खुद को सुधार ले तो समाज खुद ही अच्छा हो जाएगा। समाज को मजबूत करने के लिए आपस में भाईचारे व मोहब्बत कायम करना होगा। पैगंबर-ए-आज़म (हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) तौहीद, धार्मिक सहिष्णुता के प्रतीक, सौहार्द के संदेशवाहक और इंसानियत के मसीहा थे। आप इंसानियत के तरफदार और परस्पर प्यार के पैरोकार थे, इसलिए आपने मोहब्बत का पैगाम दिया। मोहब्बत का दूसरा नाम पैगंबर-ए-आज़म (हजरत मोहम्मद सल्लाल्लाहो अलैहि वसल्लम) है। आप रहमतुल्लिल आलमीन (समस्त दुनिया के लिए कृपा के रूप में) हैं। आपका पवित्र चरित्र गुण दरअसल सहिष्णुता की सरिता है जिसमें सौहार्द का सतत प्रवाह है। आपका व्यक्तित्व सत्य और सद्भावना का संस्कार है तो कृतित्व इस संस्कार के व्यवहार की विमलता का विस्तार। आप चूंकि धार्मिक सहिष्णुता के पक्षधर थे। लिहाजा किसी भी किस्म के फसाद को, जो सामाजिक सौहार्द के ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देता है, नापसंद फरमाते थे। आप शांति और चैन के हिमायती थे और मानते थे कि समाज की खुशहाली की इमारत बंधुत्व की बुनियाद पर ही निर्मित हो सकती है। कुरआन-ए-पाक में अल्लाह का फरमान है कि अल्लाह फसाद करने वालों से मोहब्बत नहीं करता। अल्लाह एहसान करने वालों यानी सौहार्द बढ़ाने वालों से मोहब्बत करता है। विशिष्ट अतिथि मुफ्ती मो. अजहर शम्सी ने कहा कि मां-बाप को कभी नाखुश न करो इसलिए कि उनके कदमों के नीचे जन्नत है। मां-बाप की खिदमत करने से अल्लाह की मदद आती है। मां-बाप की खिदमत करने से दीन व दुनिया दोनों में इज्जत मिलती है। यकीन न हो तो खिदमत करके देख लो। जिसने मां-बाप को राजी कर लिया उसने अल्लाह को राजी कर लिया। उस्ताद का अदब मां-बाप से ज्यादा हक रखता है जो लोग नहीं करते वह बहुत बदबख्त हैं। दुनिया तो चाहती है तबाही मेरी मगर मजबूर है वो मां की दुआओं के सामने। जो एहसान करके जताए वो सवाब का हकदार नहीं होता है। रोजा, नमाज, हज, जकात वक्त से अदा कीजिए। अल्लाह के हक के साथ बंदों का हक भी अदा कीजिए। जानवरों पर भी रहम कीजिए। इल्म हासिल कीजिए। अन्तर्राष्ट्रीय इस्लामिक वक्ता नूरानी मियां इस्माईलपुर तकिया में जलसे को संबोधित करते हुए। मस्जिदों व मदरसों को आबाद कीजिए। मदरसों पर इल्जाम लगाने वाले झूठे, मक्कार व फरेबी हैं। अंत में सलातो-सलाम पढ़कर मुल्क में अमन व तरक्की की दुआ मांगी गयी। इस मौके पर संयोजक हाफिज मो. फुरकान कादरी, हाफिज मो. मिनहाजुद्दीन फिरदौसी, हाफिज मो. कासिफ रज़ा, हाफिज मो. मोहसिन कादरी, इरफान अहमद, नवेद आलम, मनोव्वर अहमद, नदीम कादरी, मो. नसीम, साजिद अली, गुलाम सरफुद्दीन, मौलाना अली अहमद, कारी हुसैन आलम बरकाती  सहित बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे। The post दुनिया तो चाहती है तबाही मेरी मगर, मजबूर है वो मां की दुआओं के सामने appeared first on संस्कार न्यूज़.